MCD कर्मचारी: Delhi High Court का नौकरी बहाली का आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश: MCD कर्मचारी मांगे राम शर्मा की नौकरी बहाल करे

दिल्ली हाई कोर्ट ने Mange Ram Sharma & Anr. v. Municipal Corporation of Delhi मामले में MCD के दो workmen की termination को retrenchment माना और उन्हें consequential benefits के साथ reinstatement का निर्देश दिया। मामला Section 2(oo)(bb) और Section 25G, Industrial Disputes Act के प्रावधानों से जुड़ा था। एक नौकरी जो सिर्फ कागज़ पर “temporary” थी पंद्रह साल तक मांगे राम शर्मा दिल्ली नगर निगम (MCD कर्मचारी) में एक Beldar की तरह काम पर आते रहे — वही मेहनत वाला काम जो सड़कों को साफ रखता है और शहर को चलाता है, लेकिन जिसकी परवाह तभी होती है जब वह रुक जाए। वे जुलाई 2003 में इस नौकरी से जुड़े थे। उनके साथ एक और worker 2006 में जुड़ा। दोनों को Minimum Wages Act के हिसाब से daily wage दी जाती थी, और दोनों साल-दर-साल वही काम करते रहे। फिर अक्टूबर 2010 में एक दिन यह अचानक बंद हो गया। न कोई notice, न कोई explanation। ऐसी कोई list भी नहीं दी गई जिसमें बताया गया हो कि किसे और क्यों निकाला जा रहा है। बस काम बंद, और उसके बाद सैलरी भी बंद। अगर आपने कभी daily wager की तरह, muster-roll पर, या किसी “temporary” government contract पर काम किया है, तो यह कहानी आपको बहुत जानी-पहचानी लगेगी। MCD, DJB, DTC और दिल्ली के दूसरे government departments में लाखों workers बिना किसी permanent letter के सालों तक काम करते हैं — और जब employer को सही लगे, तब उन्हें बता दिया जाता है कि वे कभी permanent थे ही नहीं। यह case ठीक इसी बात का है: नौकरी असल में क्या है, और कागज़ों पर उसे क्या दिखाया गया है। जब पहली बार सिस्टम ने कहा “नहीं” मांगे राम शर्मा और उनके साथी worker चुप नहीं बैठे। वे पहले Labour Conciliation Office गए, फिर Industrial Tribunal (न्यायाधिकरण) गए — यही वह पहला रास्ता था जो उनकी स्थिति में किसी worker के लिए खुला था। लेकिन Tribunal ने उनके खिलाफ फैसला दिया। Tribunal ने कहा कि उनका case Industrial Disputes Act की Section 2(oo)(bb) के तहत उस exception में आता है, जो फिक्स्ड, short-term contract पर रखे गए worker के लिए होता है और यह भी कहा कि termination से पहले वाले साल में उन्होंने 240 दिन की सर्विस पूरी नहीं की थी, जो कानून में आमतौर पर ज़रूरी होता है। “यही वह मोड़ होता है जहां ज़्यादातर लोग हार मान लेते हैं — जब इंसाफ मांगना ही अपने आप में एक नया बोझ लगने लगता है।” लेकिन वे यहीं नहीं रुके। case दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा। Section 2(oo)(bb) पर Delhi High Court में क्या दलील दी गई यहीं पर advocate राजीव अग्रवाल (Labour Lawyer, दिल्ली) ने W.P.(C) 15847/2022 में petitioners यानी workers की तरफ से case संभाला — और यहीं से case का पूरा रुख बदल गया। उनका argument बहुत सीधा था और MCD के लिए मुश्किल भी: worker ने कभी यह दावा ही नहीं किया था कि उन्हें किसी fixed-term contract पर रखा गया था जिसकी date खत्म हो गई हो। उनके काम की कोई scheme नहीं थी, कोई project नहीं था, कोई तय end-date नहीं थी — बस एक ऐसी नौकरी जो पंद्रह साल तक बिना रुके चलती रही। और employer होने के नाते MCD ने तो कोई written statement तक file नहीं किया, न ही इसके खिलाफ कोई evidence दिया। यह फर्क सिर्फ भावनात्मक नहीं था, कानूनी तौर पर भी बहुत मायने रखता था। Industrial Disputes Act के तहत, अगर कोई employer किसी termination को Retrenchment (छंटनी) — यानी काम से हटाना — कहलाने से बचने के लिए “fixed-term contract” वाले exception का सहारा लेना चाहता है, तो यह साबित करने का burden of proof (ज़िम्मेदारी) employer की होती है, worker की नहीं। MCD यह ज़िम्मेदारी निभा नहीं पाया — कोशिश तक नहीं की। दिल्ली हाई कोर्ट ने असल में क्या कहा Justice मनोज कुमार ओहरी ने 2 सितंबर 2026 को अपने judgment में साफ बताया कि किसी employer को Retrenchment की legal definition से बचने के लिए क्या साबित करना ज़रूरी है: कि नौकरी किसी सीमित समय के project से जुड़ी थी, कि contract में यह साफ लिखा था, कि termination उस project के खत्म होने के साथ ही हुई, और कि worker को नौकरी शुरू करते वक्त ही यह सब बता दिया गया था। MCD के पास इनमें से कुछ भी नहीं था — न appointment letter, न कोई project document, न कुछ ऐसा जो दिखाए कि worker को पता था कि उनकी नौकरी खत्म होने वाली है। record में सिर्फ इतना था कि दोनों ने सालों तक casual daily wage worker की तरह काम किया। Court ने कहा कि सिर्फ इतना काफी नहीं है कि employer Retrenchment से जुड़े protection से बच जाए। Court ने Section 25G के तहत “last come, first go” के सिद्धांत पर भी चर्चा की। इसके अनुसार, सामान्यतः किसी category में सबसे बाद में नियुक्त workman को पहले retrench किया जाना चाहिए, जब तक employer किसी अन्य workman को हटाने के कारण दर्ज न करे। Delhi High Court ने क्या आदेश दिया? Delhi High Court ने माना कि management Section 2(oo)(bb) के provisions को लागू करने का आधार स्थापित नहीं कर सका और workmen की termination को retrenchment माना। Court ने impugned award को उस सीमा तक set aside किया और दोनों workmen को consequential benefits के साथ service में reinstate करने का निर्देश दिया। Regularisation से जुड़ा दूसरा reference Tribunal के पास वापस भेजा गया, क्योंकि उस मुद्दे पर Tribunal ने निर्णय नहीं दिया था। Court ने parties को 18.09.2026 को Tribunal के सामने उपस्थित होने के लिए कहा। “नौकरी छूटने का मतलब सिर्फ तनख्वाह रुकना नहीं होता, घर का पूरा सुकून रुक जाता है। यह फैसला उनके लिए है जिन्हें लगता था कि उनका हक सिर्फ कागज़ पर रह गया।” इस फैसले से क्या समझा जा सकता है? यह फैसला सिर्फ दो लोगों और एक नगर निगम तक सीमित नहीं है। Amar Pal & Anr. vs. MCD जैसे पहले के decisions और Supreme Court के S.M. Nilajkar case पर आधारित यह judgment उस principle को मज़बूत करता है जिसे दिल्ली के government departments में

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