
दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) और उसके ठेकेदारों को सफाई कर्मचारियों और सुरक्षा गार्ड्स की सेवा शर्तों में स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जो एक चल रहे औद्योगिक विवाद के बीच सेवा समाप्ति के खतरे का सामना कर रहे हैं। इन कर्मचारियों ने अपने नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को लेकर हॉस्पिटल एम्प्लाइज यूनियन के तहत केस दाखिल किया ।
हॉस्पिटल एम्प्लाइज यूनियन द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय का रुख किया, यह आशंका जताते हुए कि केस के चलते कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की जा सकती है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि सीजीएचएस द्वारा नियोजित ठेकेदार अवैध प्रथाओं में शामिल हैं, जिसमें उनके एटीएम कार्ड और पासबुक को रोककर उनके खातों में न्यूनतम मजदूरी जमा करने के बाद निकासी करना और उसके बाद निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नकद भुगतान करना शामिल है।
उच्च न्यायालय ने इन गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए श्रम आयुक्त को मामले की पूरी तरह से जांच करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जोर देकर कहा कि केवल कर्मचारियों के बयान दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा और जांचकर्ता को संबंधित बैंकों से सीसीटीवी फुटेज प्राप्त करने का निर्देश दिया ताकि आरोपों की पुष्टि की जा सके। यदि आवश्यक हो, तो श्रम आयुक्त जांच में पुलिस सहायता भी ले सकता है।
कर्मचारी सीजीएचएस के नियंत्रण में सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, फिर भी उन्हें गलत तरीके से ठेकेदार का कर्मचारी के रूप में दिखाया गया है ताकि वैधानिक दायित्वों से बचा जा सके। समाधान अधिकारी के समक्ष दायर औद्योगिक विवाद में ठेकों की दिखावटी और फर्जी प्रकृति की बात रखी गयी और कर्मचारी के नियमितीकरण के साथ-साथ समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग की गई है।
उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश से यह सुनिश्चित हो गया है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा, जिससे सेवा समाप्ति के निरंतर खतरे का सामना कर रहे कर्मचारियों को बहुत आवश्यक राहत मिली है।